वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक पेंशन देने की मांग
“60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को एक वेतन के बराबर पेंशन प्रदान की जाए।”
हमारे देश में हर नागरिक जन्म से लेकर जीवन के अंतिम समय तक किसी न किसी रूप में सरकार को टैक्स देता है। जब एक बच्चा जन्म लेता है तब उसके लिए खरीदे जाने वाले कपड़े, दवाइयाँ, दूध, खिलौने और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स लगता है। इसी प्रकार पूरे जीवनभर मेहनत करके व्यक्ति हर छोटी-बड़ी जरूरत पर टैक्स भरता है। यहाँ तक कि अंतिम संस्कार तक में उपयोग होने वाली वस्तुओं पर भी टैक्स लिया जाता है।
लेकिन दुख की बात यह है कि जब वही व्यक्ति वृद्धावस्था में पहुँचता है, तब कई बार उसके पास आय का कोई साधन नहीं बचता। बढ़ती उम्र के कारण बुजुर्ग काम नहीं कर पाते और उनकी कमाई बंद हो जाती है। ऐसे समय में कुछ लोग अपने माता-पिता की सेवा करने के बजाय उन्हें बोझ समझने लगते हैं। कई बुजुर्गों को घर से निकाल दिया जाता है और वे मजबूरी में भीख माँगने या दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर हो जाते हैं।
कुछ वरिष्ठ नागरिक ऐसे भी होते हैं जिनके बच्चे नहीं होते, तो उनके पालन-पोषण और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? जिसने अपना पूरा जीवन मेहनत करके देश और सरकार के लिए योगदान दिया, क्या उसकी वृद्धावस्था में सुरक्षा और सम्मान देना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?
इसीलिए हमारी मांग है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को एक वेतन के बराबर सम्मानजनक पेंशन दी जाए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें। यह कोई दया नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन सुनिश्चित करना एक संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की पहचान है।