भारत देश अपनी विविध संस्कृति, स्वादिष्ट भोजन और स्ट्रीट फूड के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हमारे देश की गलियों, बाजारों और शहरों में लाखों लोग स्ट्रीट फूड का व्यवसाय करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पानीपुरी, वड़ा पाव, चाट, समोसा, चाय, भेलपुरी, पराठा, इडली, डोसा और अन्य अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ बेचने वाले छोटे विक्रेता देश की अर्थव्यवस्था और रोज़गार व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि आज भी अधिकतर स्ट्रीट फूड विक्रेता अस्थायी व्यवस्था और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर हैं। इसलिए हमारी मांग है कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्थायी लाइसेंस प्रदान किया जाए।
स्ट्रीट फूड विक्रेता मेहनत और ईमानदारी से काम करके अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। उनमें से अधिकतर गरीब और मध्यम वर्ग से आते हैं। कई लोग गांवों से शहरों में रोजगार की तलाश में आते हैं और छोटी-सी खाद्य दुकान लगाकर अपना जीवन शुरू करते हैं। लेकिन स्थायी लाइसेंस न होने के कारण उन्हें हमेशा डर और असुरक्षा में काम करना पड़ता है। कई बार उन्हें नगर निगम, प्रशासनिक कार्रवाई या स्थान खाली कराने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे उनका रोजगार और परिवार दोनों प्रभावित होते हैं।
यदि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्थायी लाइसेंस मिलेगा, तो उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ काम करने का अधिकार मिलेगा। वे बिना डर के अपना व्यवसाय चला सकेंगे और अपने काम को बेहतर तरीके से विकसित कर पाएंगे। इससे लाखों छोटे व्यापारियों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
स्थायी लाइसेंस मिलने से सरकार को भी लाभ होगा। इससे स्ट्रीट फूड व्यवसाय एक संगठित व्यवस्था के अंतर्गत आएगा और स्वच्छता, गुणवत्ता तथा खाद्य सुरक्षा के नियमों का बेहतर पालन हो सकेगा। सरकार विक्रेताओं का रिकॉर्ड रख सकेगी और उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण भी दे सकेगी। इससे आम जनता को साफ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध होगा।
आज कई स्ट्रीट फूड विक्रेता बहुत कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। तेज धूप, बारिश, ठंड और प्रदूषण के बीच वे दिन-रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। समाज को यह समझना चाहिए कि ये छोटे विक्रेता केवल भोजन नहीं बेचते, बल्कि लाखों लोगों को सस्ती और स्वादिष्ट भोजन सुविधा उपलब्ध कराते हैं। विद्यार्थी, मजदूर, ऑफिस कर्मचारी और सामान्य नागरिक रोज़मर्रा के जीवन में इन पर निर्भर रहते हैं।
स्थायी लाइसेंस व्यवस्था से भ्रष्टाचार भी कम होगा। कई बार छोटे विक्रेताओं को बार-बार परेशान किया जाता है या अनावश्यक जुर्माना और दबाव झेलना पड़ता है। यदि उनके पास कानूनी और स्थायी लाइसेंस होगा, तो उन्हें सुरक्षा मिलेगी और वे सम्मानपूर्वक अपना रोजगार चला सकेंगे।
सरकार को चाहिए कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए आसान और कम खर्च वाली लाइसेंस प्रक्रिया बनाई जाए। छोटे विक्रेताओं को अधिक कागजी कार्रवाई और महंगी फीस से बचाया जाए। साथ ही उन्हें स्वच्छ पानी, कचरा प्रबंधन, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षित व्यापारिक स्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
हमारा उद्देश्य केवल लाइसेंस देना नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। जब छोटे व्यवसाय मजबूत होंगे, तभी देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। स्ट्रीट फूड विक्रेता भारत की संस्कृति, स्वाद और मेहनतकश समाज की पहचान हैं। उन्हें सुरक्षा और स्थायी अधिकार मिलना उनका हक है।
निष्कर्ष
हम मांग करते हैं कि देश के सभी स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्थायी लाइसेंस प्रदान किया जाए ताकि वे बिना डर और असुरक्षा के सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय चला सकें। सरकार उनकी आजीविका की सुरक्षा करे, स्वच्छता और सुविधाओं में सुधार करे और उन्हें देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग मानते हुए उचित अधिकार प्रदान करे। यही कदम छोटे व्यापारियों के उज्ज्वल भविष्य और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत प्रयास होगा।
